नस्लवाद

372
Representational Image|Pinterest.

रोजमर्रा प्रयोग होने वाले
कुछ शब्दों के विशेषण देखेंगे
तो एक समानता मिलेगी
जो काले रंग और नकारात्मकता
के बीच घनिष्ठता दिखाती है ।
जैसे –
काली करतूतें, काला चिट्ठा, काला साया
काला जादू, काली जबान, काली बिल्ली,
काला बाजारी, काला धन,
ब्लैक-लिस्ट, ब्लैक-मेल
और जो चीज़ें काली नहीं हैं पर बुरी हैं
उनके लिए मुहावरे बनाये गये हैं
“बुरी नज़र वाले तेरा मुँह काला”
“दाल में कुछ काला है” इत्यादि ।
कुल मिलाकर बस इतना है कि
सही चीजों का रंग क्या होता है नही पता
लेकिन बुरी चीजें काली होती हैं, ये तय है ।
जब इतनी कलंकित अवधारणाएं
एक रंग के साथ जुड़ती है तो, उस रंग के व्यक्ति के प्रति
घृणा और भेदभाव स्वभाविक हो जाता है ।
निष्कर्ष ये है कि सवाल करिये ऐसा क्यों है !?
ये बहुत ही छोटे, शायद बचकाने
पर महत्वपूर्ण सवाल है,
जो नस्लवाद की सामाजिक बीमारी
को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं ।

Dhananjay Kushwaha studies History at Kirori Mal College, University of Delhi. He tweets at @Dkay147.

Leave a Reply