लघुकथा – ‘ नफरत ’

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सुबह उठा । टी.वी. ऑन किया । देखा , न्यूज़ एंकर गुस्से में चिल्ला रहे थे कि ‘कुछ लोग हजारों करोड़ रुपया लेकर देश से भाग गए । ये पैसा गरीब जनता का था ।‘ सुनकर मन उदास हुआ । चोरों पर गुस्सा भी आया । घड़ी पर नज़र गयी तो भागा और जल्दी से तैयार होकर आफिस के लिए निकला ।
बाइक स्टार्ट करके गली से निकलकर चौराहे पर आ गया । सड़क पर शिशु से लेकर वयस्क गड्ढों को देखकर गुस्सा आया । गड्ढे के लिए जिम्मेदार लोगों को कुछ बुदबुदाता तभी दिमाग ने कहा- खामोश, बाइक का इंश्योरेन्स रिन्यू नही है। फिर मैं शांत हो गया ।
आगे भीड़ जमा थी। कुछ लोग एक व्यक्ति को पकड़कर पीट रहे थे । उसके मुँह से खून निकल आया था । लोग लात-घूंसे की बौछार करते जा रहे थे और जोर-जोर से चीख रहे थे- ‘ऐसे लोगों को मार देना चाहिए’।
मैंने बगल में खड़े एक ईमानदार दर्शक से पूछा- ‘किसलिए मार रहे हैं इसको’?
उसने बताया- ‘सामने वाली दुकान से ब्रेड का एक पैकेट चुरा के भाग रहा था’।
मुझे न्यूज़ एंकर चीखें बार-बार सुनाई दे रही थी।
तभी दिल ने दिमाग से एक प्रश्न पूछ लिया- ‘ क्या सच में लोग बुराई से नफरत करते हैं’?

लेखक – नवीन सिंह
ईमेल- [email protected]

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